पटना में पूजा के लिए पंडित जी को बुक करे

पटना में पूजा के लिए पंडीत जी बुक करना बहुत मुस्किल हो चूका है अगर आप भी पटना में पूजा के लिए पंडित जी बुक करना चाहते है तो आपको परेशान होने की आवस्यकता नहीं है अस्त्रोशिव आपको परेशानी मुक्त पूजा प्रदान करता है और सही मार्ग प्रदान करता है अस्त्रोशिव पटना में पूजा के … Read more

भगवान श्रीविष्णु

भगवान् श्रीविष्णु सर्वव्यापक भगवान ही भगवान श्रीविष्णु हैं। यह संपूर्ण विश्व भगवान विष्णु की शक्ति से ही संचालित होता है। वे निर्गुण भी हैं और सगुण भी। वे अपने चार हाथों में क्रमशः शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं। जो किरीट और कुंडलों से विभूषित, पीतांबरधारी, वनमाला तथा कौस्तुभमणिको धारण करने वाले, सुंदर … Read more

भगवान श्री सूर्य

-भगवान श्री सूर्य – जीवनदाता और प्रकाश के देवताभगवान सूर्य का परिचयहिंदू धर्म में भगवान श्री सूर्य को जीवन का स्रोत, प्रकाश के देवता और नवग्रहों के राजा माना गया है। सूर्य देव केवल भौतिक ऊर्जा ही नहीं, बल्कि आत्मबल, स्वास्थ्य और सफलता के भी दाता हैं। वे आकाश में प्रतिदिन उदय होकर सम्पूर्ण जगत … Read more

भगवान् श्रीकृष्ण

भगवान् श्रीकृष्ण ‘तू जिसे इतने उत्साहसे पहुँचाने जा रहा है, उसीका आठयाँ पुत्र तेरा काल होगा। आकाशवाणी सुनकर कंस चौंका। वह अपनी छोटी बहन देवकीको विवाह होनेके बाद बड़े उत्साहसे पहुँचाने जा रहा था। कंस मृत्युके भयसे काँप उठा। वह तलवार खींचकर अपनी बहनका वध करनेके लिये तैयार हो गया। वसुदेवजीने देवकीसे उत्पन्न शिशुओंको कंसको … Read more

एकादशी व्रत कथा

एकादशी व्रत कथा यूधिष्ठिर बोले – भाद्रपदके कृष्णपक्षमें किस नामकी एकादशी होती है। हे जनार्दन ! कहिये, मैं उसे सुनना चाहता हूँ ॥ १ ॥ श्रीकृष्ण बोले- हे राजन् ! तुम सावधान होकर सुनो, मैं विस्तारपूर्वक कहूँगा। अजा नामसे प्रसिद्ध यह एकादशो संपूर्ण पापोंको नष्ट करनेवाली है ॥ २ जोमनुष्य एकादशी व्रत कथा हृषीकेश भगवान्की … Read more

रुद्रावतार श्रीहनुमान्

रुद्रावतार श्रीहनुमान् रुद्रावतार श्रीहनुमान् भारतवर्षमें श्रीहनुमान्जीकी उपासना अत्यन्त व्यापक है। वे सभी मङ्गलोंके मूल कारण तथा रुद्रके अवतार हैं। भगवान् शंकर और नारायण परस्पर एक-दूसरेके भक्त हैं, किन्तु जब नारायणने नररूप धारण करके श्रीरामके नामसे अवतार ग्रहण किया, तब शिवजीने भगवान् श्रीरामकी उपासनाके लिये रुद्ररूपको छोड़कर वानररूपमें अवतार लिया। उनके द्वारा समुद्र लाँधकर सीताका पता … Read more

अग्निदेव

अग्निदेव अग्निदेवता यज्ञके प्रधान अङ्ग हैं। ये सर्वत्र प्रकाश करनेवाले एवं सभी पुरुषार्थीको प्रदान करनेवाले हैं। सभी रत्न अग्निसे उत्पन्न होते हैं और सभी रत्नोंको यही धारण करते हैं। वेदोंमें सर्वप्रथम ऋग्वेदका नाम आता है और उसमें प्रथम शब्द अग्नि ही प्राप्त होता है। अतः यह कहा जा सकता है कि विश्व-साहित्यका प्रथम शब्द अग्नि … Read more

नारायणकवचम्

नारायणकवचम् नारायणकवचम् नारायणकवचम् राजोवाच गुप्तः यया सहस्राक्षः सवाहान् रिपुसैनिकान् । क्रीडन्निव विनिर्जित्य त्रिलोक्या बुभुजे श्रियम् ॥१॥ भगवंस्तन्ममाख्याहि वर्म नारायणात्मकम् । यथाऽ ऽ ततायिनः शत्रून् येन गुप्तोऽजयन्मृधे ॥ २॥ श्रीशुक उवाच वृतः पुरोहितस्त्वाष्ट्रो महेन्द्रायाऽनुपृच्छते । नारायणाख्यं वर्माह तदिहैकमनाः शृणु ॥३॥ विश्वरूप उवाच धौतांघ्रिपाणिराचम्य सपवित्र उदङ्मुखः ।कृतस्वाङ्गकरन्यासो मन्त्राभ्यां वाग्यतः शुचिः ॥४॥ नारायणमयं वर्म सन्नोद् भय आगते । … Read more

आदित्यहृदय स्तोत्र’2

‘आदित्यहृदय स्तोत्र’ विनियोग ॐ अस्य आदित्य हृदयस्तोत्रस्यागस्त्यऋषिरनुष्टुपछन्दः, आदित्यहृदयभूतो भगवान ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्मविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः। ऋष्यादिन्यास ॐ अगस्त्यऋषये नमः, शिरसि। अनुष्टुपछन्दसे नमः, मुखे। आदित्यहृदयभूतब्रह्मदेवतायै नमः हृदि। ॐ बीजाय नमः, गुह्ये। रश्मिमते शक्तये नमः, पादयो:। ॐ तत्सवितुरित्यादिगायत्रीकीलकाय नमः नाभौ। करन्यास ॐ रश्मिमते अंगुष्ठाभ्यां नमः। ॐ समुद्यते तर्जनीभ्यां नमः। ॐ देवासुरनमस्कृताय मध्यमाभ्यां नमः। ॐ विवस्‍वते … Read more

ram stuti

sriram stuti 2 श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमनहरण भवभय दारुणं ।नव कंज लोचन कंज मुखकर कंज पद कंजारुणं ॥१॥ sriram stuti 2 कन्दर्प अगणित अमित छविनव नील नीरद सुन्दरं ।पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचिनोमि जनक सुतावरं ॥२॥ भजु दीनबन्धु दिनेश दानवदैत्य वंश निकन्दनं ।रघुनन्द आनन्द कन्द कोशलचन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥ शिर मुकुट कुंडल तिलकचारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।आजानु … Read more

लिङ्गाष्टक1

लिङ्गाष्टक1 ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥१॥ देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥२॥ सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥३॥ कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥४॥ लिङ्गाष्टक1Book Consultation कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥५॥ देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥६॥ लिङ्गाष्टक1 अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥७॥ सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् … Read more

श्रीरुद्राष्टकम् ॥

 श्रीरुद्राष्टकम् ॥नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥ निराकारमोंकारमूलं तुरीयंगिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।करालं महाकाल कालं कृपालंगुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥ श्रीरुद्राष्टकम्Book Consultation ॥ तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरंमनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गालसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥ चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालंप्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालंप्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ ४॥ प्रचण्डं … Read more

आशुतोष शशांक शेखर

आशुतोष शशाँक शेखर,चन्द्र मौली चिदंबरा,कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,कोटि नमन दिगम्बरा ॥ निर्विकार ओमकार अविनाशी,तुम्ही देवाधि देव,जगत सर्जक प्रलय करता,शिवम सत्यम सुंदरा ॥ निरंकार स्वरूप कालेश्वर,महा योगीश्वरा,दयानिधि दानिश्वर जय,जटाधार अभयंकरा ॥ आशुतोष शशाँक शेखर2025 शूल पानी त्रिशूल धारी,औगड़ी बाघम्बरी,जय महेश त्रिलोचनाय,विश्वनाथ विशम्भरा ॥ नाथ नागेश्वर हरो हर,पाप साप अभिशाप तम,महादेव महान भोले,सदा शिव शिव संकरा ॥ … Read more

एकदन्त शरणागति स्तोत्रम् ||

एकदन्त शरणागति स्तोत्रम् ||देवर्षय ऊचुः । सदात्मरूपं सकलादिभूतममायिनं सोऽहमचिन्त्यबोधम् ।अनादिमध्यान्तविहीनमेकं तमेकदन्तं शरणं व्रजामः ॥ १॥ अनन्तचिद्रूपमयं गणेशमभेदभेदादिविहीनमाद्यम् ।हृदि प्रकाशस्य धरं स्वधीस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजामः ॥ २॥ समाधिसंस्थं हृदि योगिनां यं प्रकाशरूपेण विभातमेतम् ।सदा निरालम्बसमाधिगम्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजामः ॥ ३॥ एकदन्त शरणागति स्तोत्रम् || स्वबिम्बभावेन विलासयुक्तां प्रत्यक्षमायां विविधस्वरूपाम् ।स्ववीर्यकं तत्र ददाति यो वै तमेकदन्तं शरणं व्रजामः … Read more

हनुमद वडवानल स्तोत्र

हनुमद वडवानल स्तोत्र के पाठ से देवों का कोप, ग्रहों का अरिष्ट, प्रेतादि बाधा, अतिकष्ट की स्थिति, रोगों का उपद्रव, चोरभय, परकृत्य तथ विषप्रभाव राह आदि ग्रहों की पीडा का नाश होता है। इसके प्रभाव से दुःस्य एवं सब प्रकार का भय दूर होता है तथा हनुमान जी की अनुकम्पा बनी रहती है। शनिवार या … Read more

श्री शिवरामाष्टकस्तोत्रम् ॥

॥ श्री शिवरामाष्टकस्तोत्रम् ॥शिवहरे शिवराम सखे प्रभो,त्रिविधताप-निवारण हे विभो। अज जनेश्वर यादव पाहि मां,शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥1॥ कमल लोचन राम दयानिधे,हर गुरो गजरक्षक गोपते। शिवतनो भव शङ्कर पाहिमां,शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥2॥ स्वजनरञ्जन मङ्गलमन्दिर,भजति तं पुरुषं परं पदम्। श्री शिवरामाष्टकस्तोत्रम् ॥ भवति तस्य सुखं परमाद्भुतं,शिवहरे विजयं कुरू मे वरम्॥3॥ जय युधिष्ठिर-वल्लभ भूपते,जय … Read more

shiv panchakshar stotram 2

श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥१॥मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥२॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥ शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥३॥ वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय,तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥४॥ shiv stuti यक्षस्वरूपाय जटाधराय,पिनाकहस्ताय सनातनाय ।दिव्याय देवाय दिगम्बराय,तस्मै य काराय नमः … Read more

श्रीहनुमानजी के जन्म1

sri hanuman stuti अतुलितबलधामं स्वणंशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् । सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥ श्रीहनुमानजीहनुमान जयंती 2025: मांगलिक दोष वाले ये खास उपाय, बदल जाएगी किस्मत! के जन्म का मूल कारण श्रीहनुमानजी के जन्म1 १. लंकापति रावण के अत्याचार से विश्व त्रस्त था । मनुष्य और पशु-पक्षियों की कौन कहे, देवता भी उसका लोहा मानते … Read more

श्रीदुर्गमानस-पूजा: शक्ति की साधना का महान्

—🕉️ श्रीदुर्गमानस-पूजा: शक्ति की साधना का महान पथ🔍 मेटा विवरण (मेटा विवरण) श्रीदुर्गमानस-पूजा क्या है, इसकी विधि, लाभ और महत्व जानें। ऑफ़लाइन श्रीदुर्गा पूजा भक्ति सेवा raghavPja.com पर उपलब्ध है। अभी बुक करें।- श्रीदुर्गामानस-पूजा क्या है? श्रीदुर्गमानस-पूजा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तुति एवं आराधना पद्धति है, जो मां दुर्गा के नव … Read more

कालसर्प योग: 12 प्रकार और उनके शांति उपाय

कुंडली के अनुसार 12 प्रकार के कालसर्प योग के शांति के उपाय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक मनुष्य के जीवन में कालसर्प योग समस्या ला देता है, यहां तक ​​कि अकाल मृत्यु का भी कारण बनता है। और मानसिक कष्ट सहना है इसके प्रभाव से कई तरह की परेशानियाँ जातकों को परेशान करना पड़ता है … Read more

हनुमान जयंती 2025: मांगलिक दोष वाले ये खास उपाय, बदल जाएगी किस्मत

हनुमान जयंती 2025: मांगलिक दोष वाले ये खास उपाय, बदल जाएगी किस्मत!

हनुमान जयंती का पर्व हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। ये दिन भगवान हनुमान की शक्ति, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। साल 2025 में हनुमान जयंती 2 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन का महत्व सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्योतिष शास्त्र में भी इसे बेहद प्रभावशाली माना जाता है। … Read more