एकादशी व्रत कथा

एकादशी व्रत कथा यूधिष्ठिर बोले – भाद्रपदके कृष्णपक्षमें किस नामकी एकादशी होती है। हे जनार्दन ! कहिये, मैं उसे सुनना चाहता हूँ ॥ १ ॥ श्रीकृष्ण बोले- हे राजन् ! तुम सावधान होकर सुनो, मैं विस्तारपूर्वक कहूँगा। अजा नामसे प्रसिद्ध यह एकादशो संपूर्ण पापोंको नष्ट करनेवाली है ॥ २ जोमनुष्य एकादशी व्रत कथा हृषीकेश भगवान्की … Read more

रुद्रावतार श्रीहनुमान्

रुद्रावतार श्रीहनुमान् रुद्रावतार श्रीहनुमान् भारतवर्षमें श्रीहनुमान्जीकी उपासना अत्यन्त व्यापक है। वे सभी मङ्गलोंके मूल कारण तथा रुद्रके अवतार हैं। भगवान् शंकर और नारायण परस्पर एक-दूसरेके भक्त हैं, किन्तु जब नारायणने नररूप धारण करके श्रीरामके नामसे अवतार ग्रहण किया, तब शिवजीने भगवान् श्रीरामकी उपासनाके लिये रुद्ररूपको छोड़कर वानररूपमें अवतार लिया। उनके द्वारा समुद्र लाँधकर सीताका पता … Read more

अग्निदेव

अग्निदेव अग्निदेवता यज्ञके प्रधान अङ्ग हैं। ये सर्वत्र प्रकाश करनेवाले एवं सभी पुरुषार्थीको प्रदान करनेवाले हैं। सभी रत्न अग्निसे उत्पन्न होते हैं और सभी रत्नोंको यही धारण करते हैं। वेदोंमें सर्वप्रथम ऋग्वेदका नाम आता है और उसमें प्रथम शब्द अग्नि ही प्राप्त होता है। अतः यह कहा जा सकता है कि विश्व-साहित्यका प्रथम शब्द अग्नि … Read more

नारायणकवचम्

नारायणकवचम् नारायणकवचम् नारायणकवचम् राजोवाच गुप्तः यया सहस्राक्षः सवाहान् रिपुसैनिकान् । क्रीडन्निव विनिर्जित्य त्रिलोक्या बुभुजे श्रियम् ॥१॥ भगवंस्तन्ममाख्याहि वर्म नारायणात्मकम् । यथाऽ ऽ ततायिनः शत्रून् येन गुप्तोऽजयन्मृधे ॥ २॥ श्रीशुक उवाच वृतः पुरोहितस्त्वाष्ट्रो महेन्द्रायाऽनुपृच्छते । नारायणाख्यं वर्माह तदिहैकमनाः शृणु ॥३॥ विश्वरूप उवाच धौतांघ्रिपाणिराचम्य सपवित्र उदङ्मुखः ।कृतस्वाङ्गकरन्यासो मन्त्राभ्यां वाग्यतः शुचिः ॥४॥ नारायणमयं वर्म सन्नोद् भय आगते । … Read more

आदित्यहृदय स्तोत्र’2

‘आदित्यहृदय स्तोत्र’ विनियोग ॐ अस्य आदित्य हृदयस्तोत्रस्यागस्त्यऋषिरनुष्टुपछन्दः, आदित्यहृदयभूतो भगवान ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्मविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः। ऋष्यादिन्यास ॐ अगस्त्यऋषये नमः, शिरसि। अनुष्टुपछन्दसे नमः, मुखे। आदित्यहृदयभूतब्रह्मदेवतायै नमः हृदि। ॐ बीजाय नमः, गुह्ये। रश्मिमते शक्तये नमः, पादयो:। ॐ तत्सवितुरित्यादिगायत्रीकीलकाय नमः नाभौ। करन्यास ॐ रश्मिमते अंगुष्ठाभ्यां नमः। ॐ समुद्यते तर्जनीभ्यां नमः। ॐ देवासुरनमस्कृताय मध्यमाभ्यां नमः। ॐ विवस्‍वते … Read more

ram stuti

sriram stuti 2 श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमनहरण भवभय दारुणं ।नव कंज लोचन कंज मुखकर कंज पद कंजारुणं ॥१॥ sriram stuti 2 कन्दर्प अगणित अमित छविनव नील नीरद सुन्दरं ।पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचिनोमि जनक सुतावरं ॥२॥ भजु दीनबन्धु दिनेश दानवदैत्य वंश निकन्दनं ।रघुनन्द आनन्द कन्द कोशलचन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥ शिर मुकुट कुंडल तिलकचारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।आजानु … Read more

लिङ्गाष्टक1

लिङ्गाष्टक1 ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥१॥ देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥२॥ सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥३॥ कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥४॥ लिङ्गाष्टक1Book Consultation कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥५॥ देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥६॥ लिङ्गाष्टक1 अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥७॥ सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् … Read more

श्रीरुद्राष्टकम् ॥

 श्रीरुद्राष्टकम् ॥नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥ निराकारमोंकारमूलं तुरीयंगिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।करालं महाकाल कालं कृपालंगुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥ श्रीरुद्राष्टकम्Book Consultation ॥ तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरंमनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गालसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥ चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालंप्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालंप्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ ४॥ प्रचण्डं … Read more

आशुतोष शशांक शेखर

आशुतोष शशाँक शेखर,चन्द्र मौली चिदंबरा,कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,कोटि नमन दिगम्बरा ॥ निर्विकार ओमकार अविनाशी,तुम्ही देवाधि देव,जगत सर्जक प्रलय करता,शिवम सत्यम सुंदरा ॥ निरंकार स्वरूप कालेश्वर,महा योगीश्वरा,दयानिधि दानिश्वर जय,जटाधार अभयंकरा ॥ आशुतोष शशाँक शेखर2025 शूल पानी त्रिशूल धारी,औगड़ी बाघम्बरी,जय महेश त्रिलोचनाय,विश्वनाथ विशम्भरा ॥ नाथ नागेश्वर हरो हर,पाप साप अभिशाप तम,महादेव महान भोले,सदा शिव शिव संकरा ॥ … Read more