कृपाशंकर पैगे जी
पटना में पूजा के लिए पंडित जी को बुक करे
पटना में पूजा के लिए पंडीत जी बुक करना बहुत मुस्किल हो चूका है अगर आप भी पटना में पूजा के लिए पंडित जी बुक करना चाहते है तो आपको परेशान होने की आवस्यकता नहीं है अस्त्रोशिव आपको परेशानी मुक्त पूजा प्रदान करता है और सही मार्ग प्रदान करता है अस्त्रोशिव पटना में पूजा के … Read more
गणेशाष्टकम् 2
चतोऽनन्तशक्तेरनन्तास जीवा चतो निर्गुणादप्रमेया गुणास्ते । यतो भाति सर्व त्रिधा भेदभित्रं सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥१॥ चतचाविरासीज्जगत्सर्वमेतत् तथाऽब्जासनी विश्वनी विश्वगीता । तणेन्द्रादयो देवसड्डा मनुष्याः सदा तं गणेशं नमाणी भजामः ॥२॥ यतो वहि-भानू भयो भूर्जलं च यतः सागराचन्द्रमा व्योष वायुः । यतः स्थावरा जङ्गमा वृक्षसद्धाः सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥३॥ यतो दानवाः किन्त्ररा यक्षसङ्घा … Read more
लक्ष्मी माता की आरती (Diwali Laxmi Mata Ki Aarti)
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माताआरतीतुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।मैया तुम ही जग-माता।।सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।मैया सुख सम्पत्ति दाता॥जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।मैया तुम ही शुभदाता॥कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, … Read more
pashupatastra
संग्रहात्मक, जगत् के रक्षक भगवान् पशुपति को प्रसन्न करने वाला यह स्तोत्र है । इस स्तोत्र में भगवान् पशुपति (शिव ) से रक्षा के निमित्त पांच श्लोकों में प्रार्थना की गयी है । हे पशुपति नाथ ! आप सर्वविध हमारी रक्षा करें । स पातु वो यस्य जटाकलापे स्थितः शशाङ्क: स्फुटहारगौरः ।नीलोत्पलानामिव नालपुञ्जे निद्रायमाणः शरदीव … Read more
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं ।आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं,श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे,प्यारी बंसी मेरो मन मोहे ।देख छवि बलिहारी मैं जाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ चरणों से निकली गंगा प्यारी,जिसने सारी दुनिया तारी ।मैं उन चरणों के दर्शन … Read more
दुर्गा चालीसा
दुर्गा चालीसा नमो नमो दुर्गे सुख करनी।नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी।तिहूं लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला।नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे।दरश करत जन अति सुख पावे॥ तुम संसार शक्ति लै कीना।पालन हेतु अन्न धन दीना॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला।तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥ प्रलयकाल सब नाशन … Read more
बृहस्पति देव की आरती
बृहस्पति देव की आरती जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगौं, कदली फल मेवा॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥ तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। जगतपिता जगदीश्वर, तुम सर्वस्व स्वामी॥ ऊँ brihaspati dev ki aarti जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥ चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता। सकल … Read more
शनि देव की आरती
शनि देव की आरती जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ ॥ जय जय श्री शनिदेव..॥ श्याम अंक वज्र दृष्टान्त चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ ॥ जय जय श्री शनिदेव..॥ शनि देव की आरतीक्रिट क्राउन शीशक रजित दीपत है लिलारी । मुक्तन की माला शोभित बलिहारी॥ ॥ … Read more
सूर्य देव की आरती
सूर्य देव की आरती
खाटू श्याम जी की आरती
खाटू श्याम जी की आरती
shiv panchakshar stotra
shiv panchakshar stotra नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनायभस्माङ्गरागाय महेश्वराय।नित्याय शुद्धाय दिगम्बरायतस्मै अपराधीाय नमः शिवाय मंदाकिनीसलिलचंदनचर्चितायनंदीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय।मन्दारपुष्पबाहुपुष्पसुपूजितायतस्मै मकराय नमः शिवायशिवाय गौरीवदनाभवृन्दसूर्याय दक्षाध्वर्नाकाय।श्रीनीलकण्ठाय वृषभध्वजायतस्मै शिकाराय नमः शिवाय कुंभोद्भवगौतमार्यमुनिन्द्र देवार्चिता शेखराय।चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनायतस्मै वक्राय नमः शिवाययज्ञस्वरूपाय जटाधरायपिनाकहस्ताय सनातनाय।दिव्याय देवाय दिगम्बरायतस्मै यकाराय नमः शिवाय पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पचेच्छिवसंनिधौ।शिवलोकमावाप्नोति शिवेन सह मोदतेअर्थवे पास हैं जिनके पास साइयों के राजा हैं, उनके माला के रूप हैं, और … Read more
bhairav chalisa
भैरव चालीसा ॥ श्री भैरव चालीसा ॥ श्री गणपति गुरु गौरी सहित पद प्रेम धरि मठ। चालीसा वन्दन करौं श्री शिव भैरवनाथ ॥ श्री भैरव संकट हरण मंगल करण कृपाल। श्याम वरण विकराल वपु लोचन लाल विशाल ॥ जय जय श्री काली के लाला। जयति जयति काशी-कुटवाला॥ जयति बटुक-भैरव भय हरे। जयति काल-भैरव बलकारी॥ जयति … Read more
saraswati chalisa
saraswati chalisa दोहा ॥जनक जननि पद कमल रज,निज मस्तक पर धारि।बन्दौं मातु सरस्वती,बुद्धि बल दे दातारि॥पूर्ण जगत में व्याप्त तव,महिमा अमित अनंतु।रामसागर के पाप को,मातु तुही अब हन्तु॥॥ चौपाई ॥जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥जय जय जय वीणाकर धारी।करती सदा सुहंस सवारी॥रूप चतुर्भुजधारी माता।सकल विश्व अन्दर विख्याता॥जग में पाप बुद्धि जब होती।जबहि धर्म … Read more
saraswati stotram
saraswati stotram विनियोगॐ अस्य श्री सरस्वतीस्तोत्रमंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः। गायत्री छन्दः।श्री सरस्वती देवता। धर्मार्थकाममोक्षार्थे जपे विनियोगः।आरूढ़ा श्वेतहंसे भ्रमति च गगने दक्षिणे चाक्षसूत्रं वामे हस्ते चदिव्याम्बरकनकमयं पुस्तकं ज्ञानगम्या। सा वीणां वादयंती स्वकरकरजपैः शास्त्रविज्ञानशब्दैःक्रीडंती दिव्यरूपा करकमलधरा भारती सुप्रसन्ना॥1॥ श्वेतपद्मासना देवी श्वेतगन्धानुलेपना।अर्चिता मुनिभिः सर्वैर्ऋषिभिः स्तूयते सदा।एवं ध्यात्वा सदा देवीं वांछितं लभते नरः॥2॥ शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्यापिनींवीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहम्।हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने … Read more
santoshi mata chalisa
santoshi mata chalisa दोहा ॥श्री गणपति पद नाय सिर,धरि हिय शारदा ध्यान।सन्तोषी मां की करुँ,कीरति सकल बखान॥॥ चौपाई ॥जय संतोषी मां जग जननी।खल मति दुष्ट दैत्य दल हननी॥गणपति देव तुम्हारे ताता।रिद्धि सिद्धि कहलावहं माता॥माता-पिता की रहौ दुलारी।कीरति केहि विधि कहुं तुम्हारी॥क्रीट मुकुट सिर अनुपम भारी।कानन कुण्डल को छवि न्यारी॥सोहत अंग छटा छवि प्यारी।सुन्दर चीर सुनहरी … Read more
ram chalisa
ram chalisa दोहा ॥आदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वाह् मृगा काञ्चनंवैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणंबाली निर्दलं समुद्र तरणं लङ्कापुरी दाहनम्पश्चद्रावनं कुम्भकर्णं हननं एतद्धि रामायणं॥ चौपाई ॥श्री रघुबीर भक्त हितकारी ।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी ॥निशि दिन ध्यान धरै जो कोई ।ता सम भक्त और नहिं होई ॥ध्यान धरे शिवजी मन माहीं ।ब्रह्मा इन्द्र पार नहिं … Read more
shree suktam
shree suktam ॐ हिरण्यवर्णं हरिणीं, सुवर्णार्जतस्त्रजाम्।चन्द्रां हिरण्यमयं लक्ष्मीं, जातवेदो मा आ वह।। तं म आ वह जातवेदो, लक्ष्मीमन्पगामिनीम्।यस्यां हिरण्यं विन्देयं, गमश्वं पुरुषान्हम्।। अश्वपूर्वां रथमध्यां, हस्तिनादप्रमोदिनिम।श्रियं देवीमुप ह्वये, श्रीमा देवी जुष्टाम्।। कं सोमितं हिरण्यप्राकारमर्द्रं ज्वलन्तिं तृप्तां तर्पयन्तिम्।पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तमिहोप ह्वये श्रियम्।। चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्ति श्रियं लोके देवजुष्टामुदारम्।तं पद्मिनीमिं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे।। … Read more
narsingh chalisa
narsingh chalisa नित-प्रति पाठ करे इक बारासो नर रहे तुम्हारा प्यारा।।35।।नरसिंह चालीसा जो जन गावेदु:ख-दरिद्र ताके निकट न आवे।।36।।चालीसा जो नर पढ़े-पढ़ावेसो नर जग में सब कुछ पावे।।37।।यह श्री नरसिंह चालीसापढ़े रंक होवे अवनीसा।।38।।जो ध्यावे सो नर सुख पावेतोही विमुख बहु दु:ख उठावे।।39।।‘शिवस्वरूप है शरण तुम्हारीहरो नाथ सब विपत्ति हमारी’।।40।।चारों युग गायें तेरी महिमा अपरंपार।निज … Read more
parvati chalisa
parvati chalisa दोहा ॥जय गिरि तनये दग्ये शम्भू प्रिये गुणखानिगणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवामिनी॥ चौपाई ॥ब्रह्मा भेद न तुम्हारे पावे, पांच बदना नित तुमको ध्यावेषट्मुखकाही न सक्तयश तेरो, सहसब श्रम करात घनेरो ॥1॥तेरो पार न पाबत माता, स्थित रक्षा ले हित दण्ड,आधार प्रबल सदृसिह अरुणाय, अति कामनाय नयन कजरारे ॥2॥ललित लालट विलेपिट … Read more
hanuman vadvanal stotra
hanuman vadvanal stotra विनियोग ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः,श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं,मम समस्त विघ्न-दोष-निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थेसकल-राज-कुल-संमोहनार्थे, मम समस्त-रोग-प्रशमनार्थम् आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त-पाप-क्षयार्थंश्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये। ध्यानमनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।। ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रमसकल-दिङ्मण्डल-यशोवितान-धवलीकृत-जगत-त्रितयवज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्रउदधि-बंधन दशशिरः कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्रअञ्जनी-गर्भ-सम्भूत … Read more
hanuman ji ki aarti
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे। hanuman ji ki … Read more
surya chalisa
surya chalisa दोहा ॥कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग,पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥चौपाई ॥जय सविता जय जयति दिवाकर,सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर॥भानु पतंग मरीची भास्कर,सविता हंस सुनूर विभाकर॥विवस्वान आदित्य विकर्तन,मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥अम्बरमणि खग रवि कहलाते,वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥ 4सहस्त्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि,मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥अरुण सदृश सारथी मनोहर,हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥मंडल की महिमा … Read more
radha chalisa
radha chalisa दोहा ॥श्री राधे वुषभानुजा,भक्तनि प्राणाधार ।वृन्दाविपिन विहारिणी,प्रानावौ बारम्बार ॥जैसो तैसो रावरौ,कृष्ण प्रिया सुखधाम ।चरण शरण निज दीजिये,सुन्दर सुखद ललाम ॥॥ चौपाई ॥जय वृषभान कुँवरी श्री श्यामा ।कीरति नंदिनी शोभा धामा ॥नित्य विहारिनि श्याम अधारा ।अमित मोद मंगल दातारा ॥रास विलासिनि रस विस्तारिनि ।सहचरि सुभग यूथ मन भावनि ॥नित्य किशोरी राधा गोरी ।श्याम प्राणधन … Read more
aparajita stotram
aparajita stotram श्रीत्रैलोक्यविजया अपराजितास्तोत्रम्। ॐ नमोऽपराजितायै। ॐ अस्य वैष्णवायः पराया अजिताय महाविद्याः वामदेव-बृहस्पति-मार्कण्डेय ऋषयः। गायत्र्युष्णुस्तुब्बृहति छंदंसि। लक्ष्मीनृसिंहो देवता । ॐ क्लीं श्रीं ह्रीं बीजम्। हुं शक्तिः । सकलकामनासिद्ध्यर्थं अपराजितविद्यामन्त्रपते विनियोगः। ॐ नीलोत्पलदलश्यामां भुजङ्गाभरन्न्विताम्। शुद्धस्फटिकासङकाशां चन्द्रकोटिभन्नम् ॥ ॥ शंखचक्रधरां देवी वैष्णवीमपराजिताम् बालेन्दुशेखरं देवीं वरदाभ्यदायिनीम् ॥ 2॥ नमस्कृत्य पपाठैनां मार्कण्डेयो महत्पाः ॥ 3॥ मार्कण्डेय उवाच – शृणुष्वं … Read more
mata vaishno devi chalisa
mata vaishno devi chalisa गरुड़ वाहिनी वैष्णवीत्रिकुटा पर्वत धामकाली, लक्ष्मी, सरस्वती,शक्ति तुम्हें प्रणाम।॥ चौपाई ॥नमो: नमो: वैष्णो वरदानी,कलि काल मे शुभ कल्याणी।मणि पर्वत पर ज्योति तुम्हारी,पिंडी रूप में हो अवतारी॥देवी देवता अंश दियो है,रत्नाकर घर जन्म लियो है।करी तपस्या राम को पाऊं,त्रेता की शक्ति कहलाऊं॥कहा राम मणि पर्वत जाओ,कलियुग की देवी कहलाओ।विष्णु रूप से कल्कि … Read more
laxmi chalisa
laxmi chalisa दोहामातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।मनो इच्छा सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥सिन्धु सुता विष्णुप्रिये नट श्री बारम्बार।ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नट श्री बारंबार ॥ टेक ॥सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोहि॥तुम समान नहीं कोई उपकारी। सब विधि पुरबहु आस हमारी॥जय जय जगत जननि जगदंबा। हर एक तुम्हीं हो … Read more
vishnu sahasra
vishnu sahasra विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः ।भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः ॥ १ ॥ पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः ।अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च ॥ २ ॥ योगो योगविदां नेता प्रधानपुरुषेश्वरः ।नारसिंहवपुः श्रीमान् केशवः पुरुषोत्तमः ॥ ३ ॥सर्वः शर्वः शिवः स्थाणुर्भूतादिर्निधिरव्ययः ।संभवो भावनो भर्ता प्रभवः प्रभुरीश्वरः ॥ ४ ॥स्वयम्भूः शम्भुरदित्यः पुष्कराक्षो महास्वनः ।अनादिनिधनो धाता विधाता धातुरुत्तमः … Read more
tulsi chalisa
tulsi chalisa दोहा ॥जय जय तुलसी भगवती सत्यवती सुखदानी ।नमो नमो हरि प्रेयसी श्री वृन्दा गुन खानी ॥श्री हरि शीश बिरजिनी, देहु अमर वर अम्ब ।जनहित हे वृन्दावनी अब न करहु विलम्ब ॥॥ चौपाई ॥धन्य धन्य श्री तलसी माता ।महिमा अगम सदा श्रुति गाता ॥हरि के प्राणहु से तुम प्यारी ।हरीहीँ हेतु कीन्हो तप भारी … Read more
vishnu chalisa
vishnu chalisa दोहा ।।विष्णु सुनिए विनायक सेवक की चिताले।कीरत कुछ वर्णन विवरण दीजै ज्ञानाय बतायें ॥।।चौपाई।।नमो विष्णु भगवान खरारी , कष्ट नशावन अखिल बिहारी।प्रबल जगत में शक्ति विवाह , त्रिभुवन फल रही उजियारी॥सुंदर रूप मनोहर सूरत , सरल स्वभाव मोहनी मूरत।तन पर पीताम्बर अति सोहत , बसंती मंगल मन मोहत॥शंख चक्र कर गदा बिराजे , … Read more
narayan kavach in hindi
न्यास- सर्वप्रथम श्रीगणेश जी तथा भगवान नारायण को नमस्कार करके नीचे लिखे प्रकार से न्यास करें – अङ्गन्यासः Shri Narayan Kavach in Hindi ऊँ ऊँ नमः पादयोः – (दाहिने हाथ की तर्जनी और अंगुठा इन दोनों को मिलाकर दोनों पैरों का स्पर्श करें)ऊँ नं नमः जानुनो – (दाहिने हाथ की तर्जनी और अंगुठा इन दोनों … Read more
कृष्ण चालीसा
krishna chalisa दोहा॥बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम ।अरुण अधर जनु बिम्बफल,नयन कमल अभिराम पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख,पीताम्बर शुभ साज ।जय मनमोहन मदन छवि,कृष्णचन्द्र महाराज ॥॥ चौपाई ॥जय यदुनन्दन जय जगवन्दन ।जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥जय यशुदा सुत नन्द दुलारे ।जय प्रभु भक्तन के दृग तारे ॥जय नट-नागर नाग नथैया ।कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया … Read more
शनि चालीसा
शनि चालीसा
aditya hridaya stotra
aditya hridaya stotra ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम् ॥1॥दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् । उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा ॥2॥राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम् । येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसे ॥3॥ आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम् । जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम् ॥4॥सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम् । चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम् ॥5॥ रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम् । पुजयस्व विवस्वन्तं … Read more
shiv chalisa
shiv chalisa दोहा ॥जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान ।कहत अयोध्यादास तुम ॥ चौपाई ॥जय गिरिजा पति दीन दयाला ।सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।कानन कुण्डल नागफनी के ॥अंग गौर शिर गंग बहाये ।मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।छवि को देखि नाग मन मोहे ॥मैना मातु की हवे दुलारी … Read more
durga chalisa
durga chalisa नमो नमो दुर्गे सुख करनी।नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी।तिहूं लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला।नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे।दरश करत जन अति सुख पावे॥ तुम संसार शक्ति लै कीना।पालन हेतु अन्न धन दीना॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला।तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥ प्रलयकाल सब नाशन … Read more
ganpati athrabshirsa
ganpati athrabshirsa श्री गणेशाय नम:’ ॐ भद्रं कर्णेभि शृणुयाम देवा:। भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्रा:।। स्थिरै रंगै स्तुष्टुवां सहस्तनुभि::। व्यशेम देवहितं यदायु:।1। ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:। स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा:। स्वस्ति न स्तार्क्ष्र्यो अरिष्ट नेमि:।। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु।2। ॐ शांति:। शांति:।। शांति:।।। ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।। त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि। त्वमेव केवलं धर्तासि।। त्वमेव केवलं हर्ताऽसि। … Read more
राम नाम के हीरे मोती के गीत
Ram naam ke heere moti lyrics राम नाम के हीरे मोती,मैं बिखराऊँ गली गली ।कृष्ण नाम के हीरे मोती,मैं बिखराऊँ गली गली ।ले लो रे कोई राम का प्यारा,शोर मचाऊँ गली गली ।ले लो रे कोई श्याम का प्यारा,शोर मचाऊँ गली गली । माया के दीवानों सुन लो,एक दिन ऐसा आएगा ।धन दौलत और माल … Read more
Shri Ram Raksha Stotra
Shri Ram Raksha Stotra shri raam श्रीगणेशायनम: । अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य । बुधकौशिक ऋषि: । श्रीसीतारामचंद्रोदेवता । अनुष्टुप् छन्द: । सीता शक्ति: । श्रीमद्हनुमान् कीलकम् । श्रीसीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ॥ ॥ अथ ध्यानम् ॥ Shri Ram Raksha Stotra Shri Ram Raksha Stotra ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं । पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् ॥ वामाङ्कारूढ-सीता-मुखकमल-मिलल्लोचनं नीरदाभं । नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं … Read more
Mahishasura Mardini Stotram
Mahishasura Mardini Stotram अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुतेगिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥ सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरतेत्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरतेदनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥ अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरतेशिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरतेजय … Read more
Om jai Jagdish Hare
ओम जय जगदीश हरे , स्वामी! Om jai Jagdish Hare जय जगदीश हरे।.भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ओम जय जगदीश हरे।.जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।स्वामी दुःख विनसे मन का।.सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ओम जय जगदीश हरे।. Om jai Jagdish Hare मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।स्वामी … Read more
rin mochan mangal stotra 2025
rin mochan mangal stotra मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः ।स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः ॥1।। लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः ।धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः॥2।। rin mochan mangal stotra rin mochan mangal stotra अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः ।व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः॥3।। एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत् ।ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात् ॥4।। धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् ।कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं … Read more
शिवजी आरती 2025
shivji aarti ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥ Homeएकानं चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरूड़ासन वृषभान साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥ दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ … Read more
rudrashtakam
rudrashtakam नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्।।1।। हे भगवन ईशान को मेरा प्रणाम ऐसे भगवान जो कि निर्वाण रूप हैं जो कि महान ॐ के दाता हैं जो सम्पूर्ण ब्रह्माण में व्यापत हैं जो अपने आपको धारण किये हुए हैं जिनके सामने गुण अवगुण का कोई महत्व नहीं, जिनका कोई विकल्प नहीं, जो … Read more
hartalika teej vrat katha 2025
hartalika teej vrat katha hartalika teej vrat katha 2025 तृतीया को मनाए जाने वाले हरतालिका तीज व्रत की कथा इस प्रकार है। एक बार भगवान शिव ने पार्वतीजी को उनके पूर्व जन्म का स्मरण कराने के उद्देश्य से इस व्रत के माहात्म्य की कथा कही थी। श्री भोलेशंकर बोले- हे गौरी! पर्वतराज हिमालय पर स्थित … Read more
गणेश जी की आरती
गणेश जी की आरती
भगवान श्रीविष्णु
भगवान् श्रीविष्णु सर्वव्यापक भगवान ही भगवान श्रीविष्णु हैं। यह संपूर्ण विश्व भगवान विष्णु की शक्ति से ही संचालित होता है। वे निर्गुण भी हैं और सगुण भी। वे अपने चार हाथों में क्रमशः शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं। जो किरीट और कुंडलों से विभूषित, पीतांबरधारी, वनमाला तथा कौस्तुभमणिको धारण करने वाले, सुंदर … Read more
भगवान श्री सूर्य
-भगवान श्री सूर्य – जीवनदाता और प्रकाश के देवताभगवान सूर्य का परिचयहिंदू धर्म में भगवान श्री सूर्य को जीवन का स्रोत, प्रकाश के देवता और नवग्रहों के राजा माना गया है। सूर्य देव केवल भौतिक ऊर्जा ही नहीं, बल्कि आत्मबल, स्वास्थ्य और सफलता के भी दाता हैं। वे आकाश में प्रतिदिन उदय होकर सम्पूर्ण जगत … Read more
मधुराष्टकं
मधुराष्टकं
भगवान् श्रीकृष्ण
भगवान् श्रीकृष्ण ‘तू जिसे इतने उत्साहसे पहुँचाने जा रहा है, उसीका आठयाँ पुत्र तेरा काल होगा। आकाशवाणी सुनकर कंस चौंका। वह अपनी छोटी बहन देवकीको विवाह होनेके बाद बड़े उत्साहसे पहुँचाने जा रहा था। कंस मृत्युके भयसे काँप उठा। वह तलवार खींचकर अपनी बहनका वध करनेके लिये तैयार हो गया। वसुदेवजीने देवकीसे उत्पन्न शिशुओंको कंसको … Read more
एकादशी व्रत कथा
एकादशी व्रत कथा यूधिष्ठिर बोले – भाद्रपदके कृष्णपक्षमें किस नामकी एकादशी होती है। हे जनार्दन ! कहिये, मैं उसे सुनना चाहता हूँ ॥ १ ॥ श्रीकृष्ण बोले- हे राजन् ! तुम सावधान होकर सुनो, मैं विस्तारपूर्वक कहूँगा। अजा नामसे प्रसिद्ध यह एकादशो संपूर्ण पापोंको नष्ट करनेवाली है ॥ २ जोमनुष्य एकादशी व्रत कथा हृषीकेश भगवान्की … Read more
रुद्रावतार श्रीहनुमान्
रुद्रावतार श्रीहनुमान् रुद्रावतार श्रीहनुमान् भारतवर्षमें श्रीहनुमान्जीकी उपासना अत्यन्त व्यापक है। वे सभी मङ्गलोंके मूल कारण तथा रुद्रके अवतार हैं। भगवान् शंकर और नारायण परस्पर एक-दूसरेके भक्त हैं, किन्तु जब नारायणने नररूप धारण करके श्रीरामके नामसे अवतार ग्रहण किया, तब शिवजीने भगवान् श्रीरामकी उपासनाके लिये रुद्ररूपको छोड़कर वानररूपमें अवतार लिया। उनके द्वारा समुद्र लाँधकर सीताका पता … Read more
अग्निदेव
अग्निदेव अग्निदेवता यज्ञके प्रधान अङ्ग हैं। ये सर्वत्र प्रकाश करनेवाले एवं सभी पुरुषार्थीको प्रदान करनेवाले हैं। सभी रत्न अग्निसे उत्पन्न होते हैं और सभी रत्नोंको यही धारण करते हैं। वेदोंमें सर्वप्रथम ऋग्वेदका नाम आता है और उसमें प्रथम शब्द अग्नि ही प्राप्त होता है। अतः यह कहा जा सकता है कि विश्व-साहित्यका प्रथम शब्द अग्नि … Read more
नारायणकवचम्
नारायणकवचम् नारायणकवचम् नारायणकवचम् राजोवाच गुप्तः यया सहस्राक्षः सवाहान् रिपुसैनिकान् । क्रीडन्निव विनिर्जित्य त्रिलोक्या बुभुजे श्रियम् ॥१॥ भगवंस्तन्ममाख्याहि वर्म नारायणात्मकम् । यथाऽ ऽ ततायिनः शत्रून् येन गुप्तोऽजयन्मृधे ॥ २॥ श्रीशुक उवाच वृतः पुरोहितस्त्वाष्ट्रो महेन्द्रायाऽनुपृच्छते । नारायणाख्यं वर्माह तदिहैकमनाः शृणु ॥३॥ विश्वरूप उवाच धौतांघ्रिपाणिराचम्य सपवित्र उदङ्मुखः ।कृतस्वाङ्गकरन्यासो मन्त्राभ्यां वाग्यतः शुचिः ॥४॥ नारायणमयं वर्म सन्नोद् भय आगते । … Read more
गजाननस्तोत्रम् (३)
गजाननस्तोत्रम् (३)
आदित्यहृदय स्तोत्र’2
‘आदित्यहृदय स्तोत्र’ विनियोग ॐ अस्य आदित्य हृदयस्तोत्रस्यागस्त्यऋषिरनुष्टुपछन्दः, आदित्यहृदयभूतो भगवान ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्मविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः। ऋष्यादिन्यास ॐ अगस्त्यऋषये नमः, शिरसि। अनुष्टुपछन्दसे नमः, मुखे। आदित्यहृदयभूतब्रह्मदेवतायै नमः हृदि। ॐ बीजाय नमः, गुह्ये। रश्मिमते शक्तये नमः, पादयो:। ॐ तत्सवितुरित्यादिगायत्रीकीलकाय नमः नाभौ। करन्यास ॐ रश्मिमते अंगुष्ठाभ्यां नमः। ॐ समुद्यते तर्जनीभ्यां नमः। ॐ देवासुरनमस्कृताय मध्यमाभ्यां नमः। ॐ विवस्वते … Read more
ram stuti
sriram stuti 2 श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमनहरण भवभय दारुणं ।नव कंज लोचन कंज मुखकर कंज पद कंजारुणं ॥१॥ sriram stuti 2 कन्दर्प अगणित अमित छविनव नील नीरद सुन्दरं ।पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचिनोमि जनक सुतावरं ॥२॥ भजु दीनबन्धु दिनेश दानवदैत्य वंश निकन्दनं ।रघुनन्द आनन्द कन्द कोशलचन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥ शिर मुकुट कुंडल तिलकचारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।आजानु … Read more
लिङ्गाष्टक1
लिङ्गाष्टक1 ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥१॥ देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥२॥ सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥३॥ कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥४॥ लिङ्गाष्टक1Book Consultation कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥५॥ देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥६॥ लिङ्गाष्टक1 अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥७॥ सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् … Read more
श्रीरुद्राष्टकम् ॥
श्रीरुद्राष्टकम् ॥नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥ निराकारमोंकारमूलं तुरीयंगिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।करालं महाकाल कालं कृपालंगुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥ श्रीरुद्राष्टकम्Book Consultation ॥ तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरंमनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गालसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥ चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालंप्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालंप्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ ४॥ प्रचण्डं … Read more
आशुतोष शशांक शेखर
आशुतोष शशाँक शेखर,चन्द्र मौली चिदंबरा,कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,कोटि नमन दिगम्बरा ॥ निर्विकार ओमकार अविनाशी,तुम्ही देवाधि देव,जगत सर्जक प्रलय करता,शिवम सत्यम सुंदरा ॥ निरंकार स्वरूप कालेश्वर,महा योगीश्वरा,दयानिधि दानिश्वर जय,जटाधार अभयंकरा ॥ आशुतोष शशाँक शेखर2025 शूल पानी त्रिशूल धारी,औगड़ी बाघम्बरी,जय महेश त्रिलोचनाय,विश्वनाथ विशम्भरा ॥ नाथ नागेश्वर हरो हर,पाप साप अभिशाप तम,महादेव महान भोले,सदा शिव शिव संकरा ॥ … Read more
एकदन्त शरणागति स्तोत्रम् ||
एकदन्त शरणागति स्तोत्रम् ||देवर्षय ऊचुः । सदात्मरूपं सकलादिभूतममायिनं सोऽहमचिन्त्यबोधम् ।अनादिमध्यान्तविहीनमेकं तमेकदन्तं शरणं व्रजामः ॥ १॥ अनन्तचिद्रूपमयं गणेशमभेदभेदादिविहीनमाद्यम् ।हृदि प्रकाशस्य धरं स्वधीस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजामः ॥ २॥ समाधिसंस्थं हृदि योगिनां यं प्रकाशरूपेण विभातमेतम् ।सदा निरालम्बसमाधिगम्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजामः ॥ ३॥ एकदन्त शरणागति स्तोत्रम् || स्वबिम्बभावेन विलासयुक्तां प्रत्यक्षमायां विविधस्वरूपाम् ।स्ववीर्यकं तत्र ददाति यो वै तमेकदन्तं शरणं व्रजामः … Read more
हनुमद वडवानल स्तोत्र
हनुमद वडवानल स्तोत्र के पाठ से देवों का कोप, ग्रहों का अरिष्ट, प्रेतादि बाधा, अतिकष्ट की स्थिति, रोगों का उपद्रव, चोरभय, परकृत्य तथ विषप्रभाव राह आदि ग्रहों की पीडा का नाश होता है। इसके प्रभाव से दुःस्य एवं सब प्रकार का भय दूर होता है तथा हनुमान जी की अनुकम्पा बनी रहती है। शनिवार या … Read more
श्री शिवरामाष्टकस्तोत्रम् ॥
॥ श्री शिवरामाष्टकस्तोत्रम् ॥शिवहरे शिवराम सखे प्रभो,त्रिविधताप-निवारण हे विभो। अज जनेश्वर यादव पाहि मां,शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥1॥ कमल लोचन राम दयानिधे,हर गुरो गजरक्षक गोपते। शिवतनो भव शङ्कर पाहिमां,शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥2॥ स्वजनरञ्जन मङ्गलमन्दिर,भजति तं पुरुषं परं पदम्। श्री शिवरामाष्टकस्तोत्रम् ॥ भवति तस्य सुखं परमाद्भुतं,शिवहरे विजयं कुरू मे वरम्॥3॥ जय युधिष्ठिर-वल्लभ भूपते,जय … Read more
shiv panchakshar stotram 2
श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥१॥मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥२॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥ शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥३॥ वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय,तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥४॥ shiv stuti यक्षस्वरूपाय जटाधराय,पिनाकहस्ताय सनातनाय ।दिव्याय देवाय दिगम्बराय,तस्मै य काराय नमः … Read more
श्रीहनुमानजी के जन्म1
sri hanuman stuti अतुलितबलधामं स्वणंशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् । सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥ श्रीहनुमानजीहनुमान जयंती 2025: मांगलिक दोष वाले ये खास उपाय, बदल जाएगी किस्मत! के जन्म का मूल कारण श्रीहनुमानजी के जन्म1 १. लंकापति रावण के अत्याचार से विश्व त्रस्त था । मनुष्य और पशु-पक्षियों की कौन कहे, देवता भी उसका लोहा मानते … Read more
श्रीदुर्गमानस-पूजा: शक्ति की साधना का महान्
—🕉️ श्रीदुर्गमानस-पूजा: शक्ति की साधना का महान पथ🔍 मेटा विवरण (मेटा विवरण) श्रीदुर्गमानस-पूजा क्या है, इसकी विधि, लाभ और महत्व जानें। ऑफ़लाइन श्रीदुर्गा पूजा भक्ति सेवा raghavPja.com पर उपलब्ध है। अभी बुक करें।- श्रीदुर्गामानस-पूजा क्या है? श्रीदुर्गमानस-पूजा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तुति एवं आराधना पद्धति है, जो मां दुर्गा के नव … Read more
Amarnath Yatra 2025
अमरनाथ यात्रा
सूर्य गोचर 2025
सूर्य गोचर
कालसर्प योग: 12 प्रकार और उनके शांति उपाय
कुंडली के अनुसार 12 प्रकार के कालसर्प योग के शांति के उपाय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक मनुष्य के जीवन में कालसर्प योग समस्या ला देता है, यहां तक कि अकाल मृत्यु का भी कारण बनता है। और मानसिक कष्ट सहना है इसके प्रभाव से कई तरह की परेशानियाँ जातकों को परेशान करना पड़ता है … Read more